रविंद्रनाथ टैगोर की रचनाएंःअंतिम प्यार 6

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6 नरेन्द्र चित्रशाला में प्रविष्ट होकर एक कुर्सी पर बैठ गया। दोनों हाथों से मुंह ढांपकर वह सोचने लगा। उसकी दशा देखकर ऐसा लगता था कि वह किसी तीव्र आत्मिक पीड़ा ...

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